असम (Assam) व पूर्वाेत्तर (Northeast) सदियाें से देश का अभिन्न अंगः राज्यपाल कटारिया (Governor of Assam)

पलाशबाड़ी रास महाेत्सव की महारजत जयंती का सफल समापन

Governor of Assam at Palashbari Raas
राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया का स्वागत

हनी झांझरी। असम के प्रसिद्ध पलाशबाड़ी रास महोत्सव (Palashbari Raas Festival) की महा रजत जयंती महोत्सव का साेमवार, 11 दिसम्बर की रात काे समापन हाे गया। गत 27 नवंबर से प्रारंभ हुए इस रास महोत्सव के समापन समारोह के उपलक्ष्य पर आयोजित सभा में मुख्य अतिथि (Chief Guest) के तौर पर असम के राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया (Governor of Assam Gulab Chand Kataria) उपस्थित रहे।

सायं 7 बजे गुवाहाटी से महज 20 किमी दूर स्थित पलाशबाड़ी के रास महोत्सव आयाेजन स्थल पर पंहुचे राज्यपाल कटारिया ने रास मंदिर व रास स्थल पर निर्मित मृन्मय मूर्तियाें का दाैरा किया। तत्पश्चात समापन समारोह में शिरकत की।

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पलाशबाड़ी रास महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष मणिमय कर की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में राज्यपाल के अलावा पलाशबाड़ी के विधायक हेमांग ठाकुरिया, एमट्रान के अध्यक्ष दीनमणि भांडार काश्यप, वरिष्ठ पत्रकार नयन प्रतिम कुमार भी मंचासीन थे। आयाेजकाें ने मंचासीन अतिथियों का फूलाम गामाेछा, सेलेंग चादर व जापी भेंट कर किया।

अपने संबाेधन में राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया ने रास आयाेजन समिति का धन्यवाद ज्ञापन करते हुवे कहा कि इस आयोजन की वजह से ही आज की पीढ़ी अपने इतिहास से जुड़ पाई है, वरना स्कूली किताबाें से ताे भगवान पहले ही हटाए जा चुके हैं। उन्होंने रामायण, महाभारत पर आधारित धारावाहिकों के निर्माताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक वक्त ऐसा भी था जब इन धारावाहिकों काे देखने के लिए देश ठहर जाया करता था।

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श्रीकृष्ण के अरुणाचल प्रदेश की रुक्मिणी के विवाह व अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुण्ड का हवाला देते हुवे उन्हाेंने कहा कि असम व पूर्वाेत्तर युगाें-युगाें से भारत का अभिन्न अंग रहे हैं आैर रहेंगे।

देश की वर्तमान परिस्थिति व ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुये राज्यपाल कटारिया ने कहा कि जब-जब धरती पर पापियाें का बोलबाला बढ़ा है, तब तब श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों का जन्म उनके नाश के लिए हुआ है, ये प्रक्रिया अब भी जारी है। महापुरुष शंकरदेव व माधवदेश भी इसी परम्परा के वाहक हैं जिन्हाेंने क्षेत्र की संस्कृति की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व न्याेछावर कर दिया।

पलाशबाड़ी रास महाेत्सव के 75 वर्ष पूर्ण होने पर उन्होंने इस उत्सव के साथ जन्म से ही जुड़े लाेगाें व आज तक इसके सफलतापूर्वक आयोजन में सहयोग करने वाले स्थानीय लाेगाें काे भी साधुवाद दिया।

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